Lightning arrester in hindi. लाइटनिंग अरेस्टर क्या है। कार्यविधि। उपयोग। प्रकार।

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग hindimetalk.com पर आपका स्वागत है आज के इस लेख में हम जानेंगे कि लाइटनिंग अरेस्टर क्या होता है और इनका उपयोग क्यों किया जाता है तथा यह कैसे कार्य करता है इसके पहले वाले लेख में हम लोगों ने जाना था कि Isolator क्या होता है तथा यह कितने प्रकार के होते हैं।

अगर आप इलेक्ट्रिकल की पढ़ाई कर रहे हैं या फिर आपको इलेक्ट्रिकल के जॉब के लिए इंटरव्यू देने जाना है या फिर आप कोई घर बनवा रहे हैं तो आपको lightning arrester के बारे में जानकारी जरूर होनी चाहिए। तो आज का हमारा लेख लाइटनिंग अरेस्टर पर ही है इस लेख में आपको lightning arrester से जुड़े सभी सवालों के जवाब टॉपिक वाइज कम शब्दों में सरल भाषा में मिल जाएगी। इससे प्राप्त ज्ञान का उपयोग आप किसी भी एग्जाम में या इंटरव्यू में करके अपनी आकांक्षाओं को पूरी कर सकते हैं। 

Lightning arrester क्या है। Lightning arrester in hindi.

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Lightning arrester को शार्ट फॉर्म में LA तथा हिंदी में तड़ित निरोधक कहते है। यह एक सुरक्षा युक्ति है जो मकान, टावर, transmission line, ट्रांसफॉर्मर आदि को आकाशी बिजली से बचाती है। ये कई प्रकार के होते हैं परंतु सभी प्रकार के लाइटनिंग अरेस्टरों का दूसरा शिरा निम्न प्रतिरोध के तार की सहायता से भूमि से जुड़ा होता है।

जब आकाशीय बिजली किसी ऐसे स्थान पर गिरती है जहा लाइटनिंग अरेस्टर नही लगे होते है तो वह सीधे भूमि में न जाकर भवन, टावर, ट्रांसमिशन लाइन आदि पर फैलने लगती है, और हम लोग जानते है की आकाशीय बिजली में बहुत ज्यादा voltage और current होता है जिससे भवन में दरार पड़ जाती है और ट्रांसमिशन लाइन के वायर गल जाते हैं तथा उससे जुड़े सभी इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण क्षतिग्रस्त हो जाते है और कई बार टावर में आग भी लग जाती हैं। जिससे भारी नुकसान होता है इससे बचने और बचाने के लिए हम lightning arrester का उपयोग करते है।

Lightning arrester कैसे काम करता है। Working of lightning arrester in hindi.

अलग अलग प्रकार के लाइटनिंग अरेस्टर के कार्य करने का तरीका अलग अलग होता है परंतु सभी लाइटनिंग अरेस्टर एक हीं सिद्धांत पर कार्य करते हैं। सभी लाइटनिंग अरेस्टर में दो टर्मिनल होते हैं पहला टर्मिनल हाई वोल्टेज टर्मिनल होता है जिससे आकाशीय बिजली लाइटनिंग अरेस्टर में प्रवेश करती है और दूसरा टर्मिनल ग्राउंड से जुड़ा होता है जो हाई वोल्टेज के आकाशीय बिजली को सीधे ग्राउंड में भेजने का कार्य करता है।

बारिश के दिनों में बारिश की वजह से मकान, पेड़ भीग जाते हैं जिससे वह एक कंडक्टर की तरह से व्यवहार करते हैं जिसके कारण पेड़ों और घरों पर सबसे ज्यादा अकाशी बिजली गिरती है परंतु इनका प्रतिरोध अधिक होने के कारण यह क्षतिग्रस्त(टूट जाते हैं या जल जाते हैं) हो जाते हैं इसलिए लाइटनिंग अरेस्टर को टावर, भवन आदि के सबसे ऊपरी हिस्से में लगाया जाता है और इसे एक निम्न प्रतिरोध तार की सहायता से जोड़ दिया जाता है ताकि जब भी अकाशी बिजली इस पर गिरे तो वह सीधे है ग्राउंड में चली जाए।

Lightning arrester के प्रकार। Types of lightning arrester in hindi.

1.Spike lightning arrester.

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स्पाइक लाइटनिंग अरेस्टर कॉपर के बने होते हैं सामान्यतः यह दो प्रकार के होते हैं। पहला खोखला दूसरा ठोस इनका उपयोग अफसर घरों के छात्र पर या टावर पर किया जाता है। खोखले स्पाइक लाइटनिंग अरेस्टर 10 मीटर के व्यास में आकाशीय बिजली को आकर्षित कर सकते हैं, जबकि ठोस स्पाइक लाइटनिंग अरेस्टर 20 मीटर की व्यास में अकाशी बिजली को आकर्षित कर सकते हैं। इनके ऊपर के भाग में नुकील शाखाएं होती हैं और नीचे एक अर्थ टर्मिनल होता है जो एक कंडक्टर की सहायता से अर्थ से जुड़ा होता है। जब इसके आसपास या इसके ऊपर आकाशी बिजली गिरती है तो यह उसे सीधा ग्राउंड में भेज देता है।

 2.Road Gap lightning Arrester.

यह लाइटनिंग अरेस्टर के सबसे सरल रूपों में से एक है। इस प्रकार के अरेस्टर में दो छड़ों के सिरों के बीच हवा का गैप होता है लाइटनिंग अरेस्टर का एक सिरा लाइन से जुड़ा होता है और दूसरा सिरा जमीन से जुड़ा होता है( निम्न प्रतिरोध के वायर से ग्राउंड होता है)। lightning arrester diagram.
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जब लाइन पर हाई वोल्टेज आता है (जब आकाशी बिजली गिरती हैं), तो  गैप के बीच की वायु अयोनाइज्ड हो जाता है जिससे छड़ों के बीच में स्पार्क होता है और फॉल्ट करंट पृथ्वी में चला जाता है। जिससे उपकरण व तंत्र सभी क्षतिग्रस्त होने से बच जाते है।

Disadvantage:- रॉड अरेस्टर के साथ दिक्कत यह है कि इसमें एक बार आर्क उत्पन्न हो जाने के बाद यह कम वोल्टेज पर भी कुछ समय के लिए जारी रह सकती है। इससे बचने के लिए रॉड के साथ सीरीज में करंट लिमिटिंग रिएक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। Rod gap lightning arrester के साथ एक दिक्कत यह भी है कि आर्क के उच्च तापमान के कारण रॉड पिघल सकती है।

3.Sphere Gap lightning Arrester.

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Sphere gap lightning arrester में चालक धातु के दो चिपटे ठोस गोले होते है पहला गोला ट्रांसफॉर्मर के फेस में एक चोक की सहायता से जुड़ा है, और दूसरा गोला भूमि(ग्राउंड) से जुड़ा है। दोनों गोलों के बीच की दूरी बहुत कम है। इन दोनो गोलों को एक स्टैंड की सहायता से कुछ गैप पर सेट किया जाता है। लाइटनिंग अरेस्टर के बीच हवा का अंतर इस तरह से सेट किया जाता है कि सामान्य परिचालन स्थिति स्पार्क न होने पाएं। 

जब lightning के कारण लाइन में high voltage आता है तो गैप के बीच में आर्क उत्पन्न होता है जो गर्म होने की वजह से समय के साथ ऊपर उठता जाता हैं और कुछ ही छड़ो में स्वतः ही बुझ जाता है। इस तरह से हाई वोल्टेज आसानी से ग्राउंड हो जाता हैं।

4.Horn Gap lightning Arrester.

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lightning arrester diagram

Horn gap lightning arrester में धातु के दो छड़ के टुकड़े एक दूसरे के विपरीत में ऊपर की ओर मुड़े होते है जो एक छोटे से वायु अंतराल से अलग होते हैं पहला छड़ लाइन से जुड़ा होता है और दूसरा छड़ ग्राउंड से सीधे कनेक्ट होते हैं। दोनो छड़ो के बीच की दूरी ऐसी होती है कि लाइन के सामान्य प्रचालन वोल्टेज पर इनमे आर्क उत्पन्न नहीं होता है लेकिन असामान्य असामान्य स्थिति में lightning के कारण लाइन में वोल्टेज बहुत अधिक बढ़ जाता है तो इनके बीच आर्क उत्पन्न हो जाता है जिससे हाई वोल्टेज आसानी से जमीन में चला जाता है। Horn gap lightning arrester का बनावट इस प्रकार होता है कि जब इसके छड़ो के बीच आर्क उत्पन्न होता है तो वह समय के साथ बड़ा होता जाता है जिससे एक सीमा पर आर्क टूट जाता है।

5.Multiple-Gap lightning Arrester.

multi-gap-lightning-arrester.
Lightning arrester diagram 

मल्टीपल गैप लाइटनिंग अरेस्टर में एक दूसरे से इंसुलेटेड छोटे चालक धातु के सिलेंडर की एक श्रृंखला होती है जो एयर गैप द्वारा एक दूसरे से अलग होते है। श्रृंखला का पहला भाग लाइन चालक से और अंतिम भाग जमीन से जुड़ा होता है। आवश्यक अंतराल की संख्या लाइन के वोल्टेज पर निर्भर करती है।

6.Impulse Protective Gap LA.

सुरक्षात्मक आवेग अंतराल LA को कम वोल्टेज आवेग अनुपात, एक से भी कम और आर्क को बुझाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उनका कार्य सिद्धांत बहुत सरल है, इसमें दो स्फेयर इलेक्ट्रोड S1 और S2 होते हैं जो क्रमशः लाइन और अरेस्टर से जुड़े होते हैं।

सहायक सुई को दो गोले S1 और S2 के मध्य में रखा जाता है। सामान्य आवृत्ति पर, धारिता C1 की प्रतिबाधा प्रतिरोधक R की प्रतिबाधा की तुलना में काफी बड़ी है। यदि C1 और C2 बराबर हैं तो सहायक इलेक्ट्रोड की क्षमता S1 और S2 के मध्य में होगी और इलेक्ट्रोड का कोई प्रभाव नहीं होगा उनके बीच फ्लैश ओवर पर।

जब तड़ित होता है तो कैपेसिटर C1 और C2 की प्रतिबाधा कम हो जाती है, प्रतिरोधक का प्रतिबाधा अब प्रभावी हो जाता है। इसके कारण, संपूर्ण वोल्टेज E और S1 के बीच के अंतर पर केंद्रित होता है। एक बार टूटने पर अंतर, E और S2 के बीच की शेष लंबाई तुरंत अनुसरण करती है

7.Electrolytic Arrester.

इलेक्ट्रोलाइट लाइटनिंग अरेस्टर में दोनो टर्मिनल के बीच में ढेर सारी एल्यूमिनियम की प्लेट होती हैं, जिनपर पर इलेक्ट्रोलाइट की कोटिंग की गई होती है। और आप जानते है कि इलेक्ट्रोलाइट करंट को फ्लो नहीं होने देता हैं। और वही एल्यूमिनियम विद्युत का एक अच्छा चालक है।

तो जब इलेक्ट्रोलाइट कोटेड एलमुनियम प्लेट को एक के ऊपर एक रखा जाता है तो यह कुचालक जैसा व्यवहार करती हैं, परंतु हाई वोल्टेज पर ये चालक जैसा व्यवहार करने लगती हैं जिससे हाई वोल्टेज आसानी से ग्राउंड में चली जाती है। यह 440 वोल्ट तक हाई रेजिस्टेंस का काम करता है। 

8.Expulsion Type Lightning Arrester.

Expulsion type lightning arrester को रॉड गैप LA में कुछ बदलाव करके बनाया गया है यह विद्युत आवृत्ति के प्रवाह को सील करता है जो वर्तमान का अनुसरण करता है। इस लाइटनिंग अरेस्टर में फाइबर से बनी एक ट्यूब होती है जो बहुत प्रभावी होती है यह स्पार्क गैप को अलग करती है। 

फाइबर ट्यूब के अंदर एक इंटरप्टिंग स्पार्क गैप होता है ऑपरेशन के दौरान रेशेदार ट्यूब के अंदर आवेग की चिंगारी के कारण आर्क ट्यूब की कुछ रेशेदार सामग्री को गैस के रूप में परिवर्तित कर देता है, जो ट्यूब के नीचे से एक वेंट के माध्यम से बाहर निकल जाता है। 

9.Valve Type Lightning Arresters. 

वाल्व टाइप लाइटनिंग अरेस्टर में दोनो टर्मिनल के बीच में दो गैप होते हैं जो नॉर्मल स्थिति में में लाइन को ग्राउंड से अलग रखता है इसके बाद एक सेट ऑफ नॉन लीनियर रेजिस्टेंस होता है जो लाइन की नॉर्मल वोल्टेज पर हाई रेजिस्टेंस देता है, परंतु लाइटनिंग के कारण हाई वोल्टेज आने पर दोनो गैप आर्क के कारण कनेक्ट हो जाते है जिसके बाद नॉन लीनियर रेजिस्टेंस भी low resistance का पाथ प्रदान करता है जिससे हाई वोल्टेज आसानी से ग्राउंड में चली जाती है। 

10.Thyrite Lightning Arrester.

हाई वोल्टेज(आसमानी बिजली) से सुरक्षा के लिए इस प्रकार के लाइटनिंग अरेस्टर का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। इसमें थाइराइट होता है जो सिरेमिक पदार्थ है (अकार्बनिक यौगिक है)। इसका प्रतिरोध वोल्टेज बढ़ाने पर तेजी घट जाता है और वोल्टेज कम होने पर प्रतिरोध बढ़ जाता है।

जब बिजली गिरती है, तो वोल्टेज बहुत अधिक बढ़ जाता है जिससे प्रतिरोध का मान बहुत गिर जाता है और हाई वोल्टेज आसानी से पृथ्वी में चली जाती है। और वोल्टेज कम होने पर थायराइट फिर से अपनी पूर्व स्थिति में आ जाती है। जिससे लाइन का अर्थ से संपर्क टूट जाता है।

11.Oxide Film Arrester.

ऑक्साइड फिल्म अरेस्टर एक नए प्रकार का लाइटनिंग अरेस्टर है जो एक कंडक्टिंग पाउडर के संपर्क में इन्सुलेशन की फिल्म से बना होता है। High voltage के आने पर इन्सुलेशन में छेद किया जाएगा, लेकिन पाउडर बहुत तेजी से इन्सुलेशन में बदल जाएगा और ओवर-वोल्टेज द्वारा मूल इन्सुलेशन में छिद्रित किसी भी छेद को प्लग कर देगा, इस प्रकार पदार्थ में एक रेजिलिंग इन्सुलेशन बन जाएगा।

12.Metal Oxide Lightning Arresters.

इसे सर्ज अरेस्टर या जिंक ऑक्साइड लाइटनिंग अरेस्टर के नाम से भी जाना जाता है। इसमें धातु ऑक्साइड प्रतिरोधक के निर्माण के लिए उपयोग किया जाने वाला तत्व, जिंक ऑक्साइड होता है। यह एक अर्धचालक एन-प्रकार का तत्व है। इंसुलेटिंग ऑक्साइड की कुछ महीन शक्ति जोड़कर सामग्री को डोप किया जाता है। पाउडर को कुछ प्रक्रियाओं से उपचारित किया जाता है और फिर इसे डिस्क के आकार में संकुचित किया जाता है। फिर डिस्क को नाइट्रोजन गैस या SF6  सया जाता है।

 इस अरेस्टर में ZNO की प्रत्येक डिस्क की सीमाओं पर एक अवरोध होता है। यह अवरोध धारा के प्रवाह को नियंत्रित करता है। सामान्य परिचालन स्थिति में, संभावित बाधा वर्तमान प्रवाह की अनुमति नहीं देती है। जब एक ओवरवॉल्टेज होता है, तो अवरोध ढह जाता है और इंसुलेटिंग से कंडक्टिंग में तेज संक्रमण होता है। करंट बहने लगता है और उछाल को जमीन की ओर मोड़ दिया जाता है।

Lightning arrester का उपयोग कहा किया जाता है।

लाइटनिंग अरेस्टर का उपयोग उनके विभिन्न प्रकार पर निर्भर करता है जैसे स्पाइक लाइटनिंग अरेस्टर का योग घरों के छतो पर, टावर के सबसे ऊपरी हिस्से पर, सोलर पैनल को बचाने के लिए उनके आसपास लगाया जाता है।

तथा अन्य लाइटनिंग अरेस्टर का उपयोग विद्युत सबस्टेशन में, ट्रांसफार्मर को बचाने के लिए उनके इनपुट और आउटपुट टर्मिनल पर लगाया जाता है। विद्युत लाइन आदि को आकाशीय बिजली से बचाने के लिए लाइटनिंग अरेस्टर लगाया जाता है।

अक्क्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके उत्तर।

1: lightning arrester फेल क्यों होते है?

उत्तर: जब लाइटनिंग अरेस्टर की क्षमता से अधिक वोल्टेज आ जाता है तो भी लाइटनिंग अरेस्टर फेल हो जाते हैं।

2. LA का क्या मतलब होता है?

उत्तर: Lightning Arrester.

3. LA कहा लगाना चाहिए?

उत्तर: सबसे ऊंचे स्थान पर।

4. Lightning arrester price.

उत्तर: भारत में छोटे  साइज का spike lightning arrester 400₹ 500₹ में और बड़े साइज का LA 4000₹ से 5000₹ में मिलता है।

5. क्या सोलर पैनल पर बिजली गिर सकती है?

उत्तर: जी हा सोलर पैनल भी आकाशीय बिजली को आकर्षित करता है।

निष्कर्ष! 
उम्मीद आप सबको lightning arrester kya hai कैसे काम करता है और कितने प्रकार का होता है ये अच्छे से समझ में आ गया होगा। यदि आपके पास लाइटनिंग अरेस्टर से जुड़ा कोई भी सवाल है तो हमसे पूछ सकते है। धन्यवाद!

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