चलती ट्रेन में चैन खींचने से ट्रेन रुक कैसे जाती हैं। Braking system in train in hindi

जय हिंद दोस्तों कैसे हैं आप लोग hindimetalk.com पर आपका स्वागत है आज के इस लेख में हम जानेंगे कि चलती हुई ट्रेन में चेन पुलिंग करने से क्या होता है कि ट्रेन रुक जाती है साथ ही इस आर्टिकल में हम लोग यह भी जानेंगे की चेन खींचने पर कैसे पता चलता है कि किस डिब्बे से चेन खींची गई है।

अगर आपने ट्रेन में सफर किया होगा तो आपको पता होगा कि ट्रेन में चेन पुलिंग कैसे की जाती है इसलिए इस लेख में हम यह जानेंगे कि चेन पुलिंग के बाद क्या होता है न कि चेन पुलिंग कैसे की जाती है क्योंकि यह आपको पहले से ही पता है।

आज के हमारे इस आर्टिकल का मुख्य उद्देश्य आपको ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम की जानकारी देना है इस आर्टिकल के मध्यम से आप ब्रेकिंग सिस्टम को बहुत आसानी से समझ लेंगे।

तो आइए शुरू करते हैं।

रेलगाड़ी का ब्रेकिंग प्रणाली। Braking system in train.

ट्रेन में अब सामान्यतः एयर ब्रेक सिस्टम का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है ब्रेकिंग के इस प्रणाली में सामान्य अवस्था में जब ट्रेन खड़ी होती है तब उस पर ब्रेक लगा होता है जब ट्रेन को चलाना होता है तो ब्रेक को हटा दिया जाता है। 

ब्रेकिंग के इस प्रणाली में ट्रेन की सभी बोगियों के पहयों पर ब्रेकिंग शू लगे होते हैं जोकि कंप्रेस्ड एयर पाइप से जुड़े होते हैं जिन्हें प्रेशर पाइप या ब्रेक पाइप भी कहते है यहां दो पाइपे होती हैं एक जिससे ब्रेक लगाते समय हवा को बाहर निकाला जाता है और दूसरा ब्रेक को हटाते समय कंप्रेस्ड हवा को भरा जाता है। 

आपने अक्सर देखा होगा कि जब ट्रेन चलने वाली होती है तब कभी कभी हवा निकलने की आवाज आती है क्योंकि इस समय ब्रेक को हटाने के लिए उसमे कंप्रेश हवा को भरा जाता है जिसकी वजह से जहा प्रेशर पाइप के जोड़ ढीले होते हैं वहा से हवा निकलने लगता है।

कंप्रेश हवा को भरने भरने के लिए लोकोमोटिव इंजन में एक कॉप्रेशर लगा होता है।

जब कोई ट्रेन चल रही होती है उस समय उस पर किसी प्रकार का ब्रेक नहीं लगा होता है इस समय ब्रेक शूज पहियों से 5mm की दूरी पर होते हैं। जब ब्रेक लगाना होता है तो हवा को बाहर निकाल दिया जाता है जिससे ब्रेक शूज पहियों से चिपक जाते हैं, प्रेशर पाइप में हवा का दबाव बहुत अधिक होता हैं लगभग 5cm प्रति वर्ग Kg यही कारण है जब ट्रेन का ब्रेक लगाया जाता है तब हवा निकलने की तेज आवाज आती है।

ट्रेन के प्रत्येक बोगी का प्रेशर पाइप आपस में एक दूसरे से जुड़े होते हैं जिसकी वजह से ट्रेन में किसी भी बोगी से ब्रेक लगाया जा सकता है। ब्रेक लगाने पर ट्रेन की सभी बोगियों में एक साथ एक समान रूप से ब्रेक लगता है क्योंकि प्रेसर पाइप आपस में जुड़े होते हैं।

ट्रेन में यात्रियों और ट्रेन की सुरक्षा के लिए ब्रेक को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि अगर किस भी ट्रेन में ब्रेक तब लगाया जाए जब ट्रेन अपनी पूरी स्पीड में हो तो ट्रेन पूरी तरह से रुकने में लगभग 1 km की दूरी तय कर लेता है। अतः ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक लगाने के बाद ट्रेन लगभग 1KM दूर जाकर रुकेगी। 

अब आइए ट्रेन के braking system को एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं।

मान लीजिए एक गुब्बारा है जिसके अंदर कोई घूमने उपकरण और इस समय उसमे हवा नही भरा है तो इस स्थिति में जो भी घूमने वाला उपकरण है वह नही घूमेगा क्योंकि गुब्बारा उसमे चारो ओर से चिपका होगा, लेकिन जब गुब्बारे में हवा भरा जाएगा तब इसमें बहुत अधिक जगह बन जायेगा जिससे जो भी घूमने वाला उपकरण होगा वह आसानी से घूम पाएगा। और फिर जब हवा को निकाल दिया जाए तो उपकरण फिर से रुक जायेगा क्योंकि गुब्बारा उसमे चारो तरफ से चिपक जाएगा।


चलती ट्रेन में चेन खींचने से क्या होता है। Chain puling in train in hindi.

जैसा कि आपने जाना ट्रेन के ब्रेक का प्रेशर पाइप सभी बोगीयों से आपस में जुड़ा होता है इसलिए ट्रेन के किसी भी बोगी से चेन खींचने से उस बोगी के प्रेसर पाइप या सिलेंडर का वाल्व खुल जाता है और वहां से तेजी से हवा बाहर निकलने लगता है जिसकी वजह से ट्रेन के सभी बोगियो में समान रूप से ब्रेक अप्लाई हो जाता है और ट्रेन धीरे-धीरे रुक जाती है।

चेन पुलिंग करने पर सभी बोगियों में एक समान रूप से ब्रेक इसलिए लगता है क्योंकि प्रेशर पाइप सभी बोगियों का प्रेसर पाइप आपस में जुड़ा होता है इसलिए कहीं से भी हवा निकलने पर पूरे पाइप का प्रेशर कम हो जाता है जिससे सभी बोगियों में एक साथ ब्रेक लगता है।

जरूरी नहीं आएगी चेन खींचने पर ट्रेन रुक ही जाएगी यदि ट्रेन का ड्राइवर चाहे तो ट्रेन चेन पुलिंग के बावजूद ट्रेन को बिना रोके चला सकता है, इस स्थिति में ड्राइवर फीडर पाइप से लगातार प्रेसर सिलेंडर में हवा को भरता रहता है।


कैसे पता चलता है कि किस डिब्बे से चेन पुलिंग की गई है।

इसके लिए ट्रेन के प्रत्येक डिब्बे में कुछ उपकरण लगाए गए हैं जो संकेत देते हैं की किस बोगी से चेन पुलिंग की गई है आइए उनके बारे में जानते हैं।

ACP light: इसका पूरा नाम automatic chain puling light है यह एक प्रकार का लाइट होता है जो लगभग सभी ट्रेनों के बोगियो पर लगे होते हैं यह अक्सर ट्रेन के दरवाजे दूर खिड़कियों से ऊपर लगे होते हैं।

ट्रेन के जिस भी डिब्बे से चेन पुलिंग की जाती है उस डिब्बे का ACP लाइट जलने लगता है जिससे टीटी और गार्ड को आसानी से पता चल जाता है कि किस डिब्बे से चेन पुलिंग की गई है।

चेन पुलिंग होने पर ट्रेन का ड्राइवर यानी लोको पायलट तीन छोटे छोटे हॉर्न बजाता है जिससे ट्रेन में उपस्थित टीटी, गार्ड, जीआरपी, और RPF को पता चल जाता है कि चेन पुलिंग की गई है। स्टेशन से दूर चेन पुलिंग करने का मुख्य उद्देश्य होता है ट्रेन से उतरना अतः चेन पुलिंग के बाद जब कोई व्यक्ति ट्रेन से उतरता है तो उसे पकड़ लिया जाता हैं।

ट्रेन के जिस डिब्बे से चेन पुलिंग की गई होती है वहां से बहुत तेज हवा निकलने की आवाज आती है जिसकी वजह से बहुत अच्छा लगे पता चल जाता है कि इस डिब्बे से चैन कुली की गई है।

ट्रेन के प्रत्येक डिब्बे के अंत में कोने पर ऊपर एक छोटा हैंडल होता है जो सामान्यता क्षैतिज अवस्था में होता है जब चेन पुलिंग की जाती है तब यह ऊर्ध्वधार स्थिति में हो जाता है जिसको देख कर TT, RPF और गार्ड को आसानी से पता चल जाता है कि किस बोगी से चेन पुलिंग की गई है।

चेन पुलिंग के नियम। चेन पुलिंग करने पर सजा।

भारतीय रेलवे के एक्ट 1989 सेक्शन 141 के तहत बेवजह चैन पुलिंग करना कानूनन जुर्म है और यह एक दंडनीय अपराध है। इसके तहत चेन पुलिंग करने वाले को 1 साल की जेल या 1000₹ का जुर्माना देना पड़ सकता है या फिर ये दोनो एक साथ हो सकता हैं। 

ये निर्भर करता है कि चेन पुलिंग करने वाले ने किस मकसद से चैन पुलिंग की थी।


चेन पुलिंग कब करना चाहिए। चेन पुलिंग कब किया जाता है।

भारतीय रेलवे में आप चैन पुलिंग विषम परिस्थितियों में ही कर सकते हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में आप किसी प्रकार के दंड के पात्र नहीं होंगे।

  • जब ट्रेन में आग लग जाए तो ऐसे अवस्था में चेन पुलिंग की जा सकती है।
  • जब किसी यात्री की तबियत आचनक से बहुत ज्यादा खराब हो जाए तब चेन पुलिंग किया जा सकता है।
  • यदि चलती ट्रेन में किसी का बच्चा खो जाए या स्टेशन पर छूट जाए तो भी चैन पुलिंग की जा सकती है।
  • अगर चलती ट्रेन में किसी की हत्या हो जाए या कोई व्यक्ति अचानक से हमलावर हो जाए तो भी चैन पुलिंग की जा सकती है।

ट्रेन में ब्रेक लगाने पर दुर्गन्ध क्यों आती है। 

ट्रेन के पहियों पर जो ब्रेकिंग शूज लगे होते हैं वो जब ब्रेक हटाया जाता है तो पहियों से 5mm दूर हो जाते हैं और जब ट्रेन में ब्रेक लगाया जाता है तब ये ब्रेक शूज पहियों से चिपक कर घिसने लगते है ट्रेन की स्पीड के कारण ये ब्रेक शूज घिसते घिसते बहुत अधिक गर्म होकर जलने लगता है जिसकी वजह से ट्रेन में ब्रेक लगाने पर दुर्गन्ध आती है। 

जनरल डिब्बे में से यह दुर्गन्ध अधिक आती हैं क्योंकि भीड़ के कारण पहिए और ब्रेक शूज की दूरी मात्र 2 से 3mm रह जाती है जबकि ब्रेक सभी जगह समान रूप से लगता है यह ब्रेकिंग शूज पहियों के मध्य दूरी कम होने से ब्रेक शूज अधिक घिसते है जिसकी वजह से यह दुर्गन्ध अन्य डिब्बों की अपेक्षा जनरल डिब्बे से अधिक आती है।


ट्रेन का ड्राइवर पटरी पर किसी को देखने के बाद भी ब्रेक नही लगता है क्यों?

ट्रेन का ड्राइवर किसी व्यक्ति, पशु, वाहन आदि को देखने के बाद भी इमरजेंसी ब्रेक नही लगाता क्योंकि ट्रेन स्पीड में होती है तब इमरजेंसी ब्रेक लगाने पर भी वह कम से कम 800 मीटर से 1200 मीटर दूर जाकर रुकती है, ऐसे में यदि कोई ट्रेन का ड्राइवर किसी व्यक्ति या पशु को रेलवे ट्रैक पर देख भी लेता है तो उसके पास इतना समय नहीं होता है कि वह ट्रेन को रोक दें ताकि वह व्यक्ति या पशु बच जाए।

दूसरा कारण यह भी है कि भारत में अक्सर लोग ट्रैक को पार करते रहते हैं ऐसे में यदि कोई व्यक्ति ट्रैक पर दिखाई देता है तो ट्रेन का ड्राइवर यानी लोको पायलट को लगता है कि हो सकता है यह ट्रैक पार कर रहा हो। लेकिन जब कट जाता हैं तब पता चलता है कि वो तो मरने आया था।😇 ये उदाहरण केवल उन इंसानों के लिए है।

रात में तो लोको पायलट को उतनी ही दूरी तक दिखाई देता है जहा तक ट्रेन के लाइट की रोशनी जाती है जो लगभग 1 km की दूरी होती है ऐसे में ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक लगाने का कोई मतलब ही नहीं निकलता है क्योंकि उतना दूर तक तो ट्रेन जाकर रुकेगी ही। ऐसे में मान लीजिए ट्रेन का ड्राइवर ब्रेक लगाने में 15-20 सेकंड देर कर देता है तो क्या होगा।

यदि मान लीजिए ऐसे ही किसी के सामने आ जाने से ट्रेन रुकने लगा तो कोई भी सामने आकर ट्रेन को रोक कर ट्रेन को लूट सकता है।


निष्कर्ष! 

आज हम लोगो ने जाना कि ट्रेन का ब्रेक कैसे काम करता है। और चलती ट्रेन में चेन खींचने से क्या होता है। साथ ही हम लोगो ने यह भी जान लिया कि चैन पुलिंग कब करना चाहिए। अगर आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया है तो अपने उन सभी मित्रों के साथ साझा करें जिन्हें नहीं पता है कि कैसे पता चलता है कि किस डिब्बे से चैन पुलिंग की गई है।

अगर आप ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम को और भी आसानी से और अच्छे तरीके से वीडियो के माध्यम से समझना चाहते हैं तो आप khan sir का ये वीडियो देख लीजिए।

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